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Vaishali Vigilance Action: वैशाली समाहरणालय में 2 हजार रिश्वत लेते लिपिक गिरफ्तार, निगरानी की बड़ी कार्रवाई

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Alam Ki Khabar: वैशाली समाहरणालय में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लिपिक को 2 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। पीडीएस लाइसेंस बहाली से जुड़ा है मामला।

वैशाली, 07 जुलाई। आलम की खबर: सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में वैशाली समाहरणालय स्थित अनुमंडल कार्यालय में मंगलवार को निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लिपिक को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लिपिक की पहचान सुमन सौरभ के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि लिपिक ने एक पीडीएस दुकानदार से लाइसेंस से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 2 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मामले का सत्यापन कराया और आरोप सही पाए जाने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार लालगंज प्रखंड के लक्ष्मीनारायणपुर निवासी पीडीएस दुकानदार किशन कुमार का लाइसेंस पहले अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा निलंबित किया गया था। बाद में जिलाधिकारी न्यायालय से लाइसेंस बहाल कर दिया गया। इसी बहाली से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए अनुमंडल कार्यालय के लिपिक सुमन सौरभ द्वारा कथित रूप से रिश्वत की मांग की गई थी।

पीडीएस दुकानदार किशन कुमार ने रिश्वत देने के बजाय इसकी शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की। शिकायत के बाद निगरानी टीम ने पूरे मामले की जांच की और शिकायत की पुष्टि होने पर कार्रवाई की योजना बनाई।

मंगलवार को निगरानी टीम ने समाहरणालय स्थित अनुमंडल कार्यालय में पहुंचकर लिपिक को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने रिश्वत की राशि भी बरामद की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी लिपिक को पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया है।

निगरानी विभाग की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आरोपी को विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।

समाहरणालय परिसर में हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला मुख्यालय स्थित इस कार्यालय में हुई कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि जांच एजेंसी की पूछताछ और आगे की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

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संपादकीय: भ्रष्टाचार पर कार्रवाई जरूरी, जवाबदेही भी तय हो

सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतें आम जनता के लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। छोटे-छोटे कामों के लिए जब लोगों से अवैध पैसे की मांग की जाती है तो इससे प्रशासन के प्रति विश्वास कमजोर होता है।

निगरानी विभाग की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक संदेश है कि गलत काम करने वालों पर कानून का शिकंजा कस सकता है। लेकिन केवल गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां आम लोगों को बिना परेशानी के सेवाएं मिल सकें।

जरूरत है कि हर स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। तभी सुशासन की व्यवस्था मजबूत होगी।

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